Wednesday, June 4, 2008

उजाला.....

उजाला,
जैसे मेरे लिए एक अनदेखा, अनजान तोहफा था .....
जो मेरे एक दोस्त ने कुछ दिनों पहले दिया .....
खोलकर देखा ...
रोशनी इतनी थी ... मेरी कमजोर आँखे सह न सकीं .....
अब शायद ज़िंदगी भर देख न सकूँगा .........
अब सोचता हूँ ...
पहले धुंधला ही सही पर दिखता तो था ........

1 comment:

Unknown said...

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