कल सुबह एक डरावने ख्वाब कि दस्तक पर आँख खुली ...
सुकून मिला ....बुरा ख्वाब था, टूट गया ...
काश ज़िन्दगी एक ख्वाब होती ......
Wednesday, June 4, 2008
उजाला.....
उजाला,
जैसे मेरे लिए एक अनदेखा, अनजान तोहफा था .....
जो मेरे एक दोस्त ने कुछ दिनों पहले दिया .....
खोलकर देखा ...
रोशनी इतनी थी ... मेरी कमजोर आँखे सह न सकीं .....
अब शायद ज़िंदगी भर देख न सकूँगा .........
अब सोचता हूँ ...
पहले धुंधला ही सही पर दिखता तो था ........
जैसे मेरे लिए एक अनदेखा, अनजान तोहफा था .....
जो मेरे एक दोस्त ने कुछ दिनों पहले दिया .....
खोलकर देखा ...
रोशनी इतनी थी ... मेरी कमजोर आँखे सह न सकीं .....
अब शायद ज़िंदगी भर देख न सकूँगा .........
अब सोचता हूँ ...
पहले धुंधला ही सही पर दिखता तो था ........
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