Thursday, July 31, 2008

तुमने कभी मेरे दिल को पड़ा ही नहीं....

इस से पहले कि लोग कचरा समझ कर फेंक दे ....

पड़ लो इसे, अभी भी पड़ा होगा ...

तुम्हारे घर के कोने में, किसी पुराने अखबार कि तरह ....

Wednesday, June 4, 2008

ख्वाब.......

कल सुबह एक डरावने ख्वाब कि दस्तक पर आँख खुली ...
सुकून मिला ....बुरा ख्वाब था, टूट गया ...
काश ज़िन्दगी एक ख्वाब होती ......

उजाला.....

उजाला,
जैसे मेरे लिए एक अनदेखा, अनजान तोहफा था .....
जो मेरे एक दोस्त ने कुछ दिनों पहले दिया .....
खोलकर देखा ...
रोशनी इतनी थी ... मेरी कमजोर आँखे सह न सकीं .....
अब शायद ज़िंदगी भर देख न सकूँगा .........
अब सोचता हूँ ...
पहले धुंधला ही सही पर दिखता तो था ........