उजाला, जैसे मेरे लिए एक अनदेखा, अनजान तोहफा था ..... जो मेरे एक दोस्त ने कुछ दिनों पहले दिया ..... खोलकर देखा ... रोशनी इतनी थी ... मेरी कमजोर आँखे सह न सकीं ..... अब शायद ज़िंदगी भर देख न सकूँगा ......... अब सोचता हूँ ... पहले धुंधला ही सही पर दिखता तो था ........